एक और weekend..
फ़िर से.. कब पांच दिन निकल गये.. पता ही नही चला.. वैसे ठीक से सोचा जाये तो पांच दिन आखिरि के दो दिनो से बहुत ज्यादा होते हैं.. पर यहां पर सभी गणित फ़ेल हो गयी है.. weekend यानी के आखिरि के दो दिन मुझे पूरे हफ़्ते से बडे लगने लग गये हैं.. शुक्रवार रात से जो येह चालू होता है तो फ़िर सोमवार सुबह तक खत्म होने का नाम नहीं लेता है.. ६० घंटे.. सोचिये.. पता नहीं इस बार कैसे निकलेंगे..
पर एक समय था जब weekend आता है.. तो अजीब सी खुशी होती थी.. ज्यादातर सारी प्लानिंग मैं ही बनाता था.. कहां घूमना है.. कहां खाना-पीना है.. और फ़िर दो मूवी नहीं देखीं तो फ़िर काहे का weekend.. दोस्तॊं के साथ बिताये वो दिन.. क्या दिन थे.. फ़िर चाहे गर्मी हो या ठंड.. और तो ओर बारिश भी नहीं दिखती थी.. वोही ६० घंटे कम पड जाते थे..
यहां पे भी बारिश हो रही है आजकल.. मुझे बहुत पसन्द है येह मौसम.. लेकिन सब बदल गया है.. सब कुछ.. येह मौसम.. येह बारिश.. येह weekend भी..
अरे कुछ दिन रुकिये, हिन्दी ब्लौगिंग का चस्का लगने दीजये| पता नहीं चलेगा कि कब weekend समाप्त हुआ| बस प्रतीक्षा रहेगी अगले weekend की
Comment by उन्मुक्त — August 11, 2006 @ 2:02 pm
हो कहाँ भईये, जो इस बुरी कदर बोर हो रहे हो.अरे, ब्लागिंग मे मन लगाओ..समय पंख लगा लेता है वो भी रंग बिरंगे.
Comment by समीर लाल — August 12, 2006 @ 1:55 am
Being bored is just wrong. There are so many things to do, if nothing else contribute to some open source project
, joing big-brother big-sister, go to the gym. If all else fails go to http://www.youtube.com and video.google.com Also keep blogging !
Comment by kali — August 20, 2006 @ 1:02 pm
खालीपीली समय मे लिखते रहीये पढते रहीये पता ही नही चलेगा की सप्ताहांत कब आया और कब गया।
हम यही करते है।
Comment by आशीष — September 27, 2006 @ 3:45 am